Wednesday, February 29, 2012

कान्हा कान्हा ओ कान्हा..


कान्हा कान्हा ओ कान्हा
तुझ को पुकारूँ दिन रैन

दर्श दिखा जा 

दिल में समा जा,
आजा रे कान्हा 

मेरे घर आजा,
मोरा मनवा है बेचैन!
कान्हा कान्हा ओ कान्हा..
तुझ को पुकारूँ दिन रैन!

राह तकूँ मैं तोरी 

अँखियाँ थकी है मोरी,
अटकी हुई तुझ पे,

मेरे सांसों की डोरी
तरस गए है मोरे नैन!
कान्हा कान्हा ओ कान्हा..
तुझ को पुकारूँ दिन रैन!



मेरे प्रभु मेरे गिरधर,
आ जाओ तुम मोरे घर,
चरणों में तेरे मेरा,
झुका हुआ है ये सर,
आये न तेरे बिन चैन
कान्हा कान्हा ओ कान्हा..
तुझ को पुकारूँ दिन रैन!

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर...
    जय श्री कृष्णा

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  2. बहुत ही बढ़िया
    बहुत ही सुन्दर भावमय रचना...
    :-)
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  3. सुन्दर रचना कृष्ण के भाव में रची ...
    आपको और परिवार में सभी को होली की मंगल कामनाएं ...

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर रचना..

    ReplyDelete

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